फेवस और फंगस fevas or fungas
फेवस और फंगस
नीम : नीम की पत्तियों के बने काढ़े से रोजाना सिर को धोने से और एरण्ड के तेल और नारियल के तेल को एकसाथ मिलाकर शरीर में जख्म वाले भाग पर रोजाना लगाने से फंगस रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
धतूरा : धतूरे के पत्तों से बने तेल का लेप करने से ऐसे दाद या फंगस जैसे त्वचा के रोगों में लाभ होता है।
पित्तपापड़ा : 50 मिलीलीटर से 100 मिलीलीटर तक पित्तपापड़ा का रस इतनी ही मात्रा में पानी के साथ मिलाकर पीने से फंगस रोग में आराम आ जाता है।
उस्वा : 20 से 50 मिलीलीटर उश्वा (उस्वा) के रस को इतने ही पानी में मिलाकर पीने से फंगस रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
फूलवाली कनेर : सफेद या रक्त फूलवाली कनेर की जड़ को तेल में मिलाकर पका लें। इस तेल की नियमित रूप से मालिश करने से फंगस जैसे रोगों के साथ-साथ जख्म की सूजन, कोढ़, कण्डू (खुजली) शुष्क (सूखी खुजली) और पपड़ी युक्त रोग भी दूर होते हैं।
फंगस एक फैलने वाला रोग है जो फंगस नाम के जीवाणु से पैदा होता है। इस रोग में पहले रोगी के शरीर पर दाद के जैसे छोटे-छोटे निशान पैदा हो जाते हैं जो बाद में एकसाथ मिलकर फैल जाते हैं। इस रोग में रोगी के शरीर के दानों में से मरे हुए चूहे के जैसी बदबू आती है।परिचय :
विभिन्न औषधियों से उपचार-नीम : नीम की पत्तियों के बने काढ़े से रोजाना सिर को धोने से और एरण्ड के तेल और नारियल के तेल को एकसाथ मिलाकर शरीर में जख्म वाले भाग पर रोजाना लगाने से फंगस रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
धतूरा : धतूरे के पत्तों से बने तेल का लेप करने से ऐसे दाद या फंगस जैसे त्वचा के रोगों में लाभ होता है।
पित्तपापड़ा : 50 मिलीलीटर से 100 मिलीलीटर तक पित्तपापड़ा का रस इतनी ही मात्रा में पानी के साथ मिलाकर पीने से फंगस रोग में आराम आ जाता है।
उस्वा : 20 से 50 मिलीलीटर उश्वा (उस्वा) के रस को इतने ही पानी में मिलाकर पीने से फंगस रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
फूलवाली कनेर : सफेद या रक्त फूलवाली कनेर की जड़ को तेल में मिलाकर पका लें। इस तेल की नियमित रूप से मालिश करने से फंगस जैसे रोगों के साथ-साथ जख्म की सूजन, कोढ़, कण्डू (खुजली) शुष्क (सूखी खुजली) और पपड़ी युक्त रोग भी दूर होते हैं।
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