वीर्य के दोष दूर करें ,REMOVING SPERM DISORDERS
वीर्य के दोष दूर करें
चिकित्सा :
1. ब्राह्मी : ब्राह्मी, शंखपुष्पी, खरैटी, ब्रह्मदण्डी और कालीमिर्च को पीसकर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।
2. बबूल :
3. शतावर :
6. छोटी दुधी : छोटी दुधी का चूर्ण मिश्री मिलाकर दूध के साथ खायें इससे वीर्य शुद्ध होता जाता है।
7. तालमखाना : तालमखाना मे मिश्री मिलाकर खाने से वीर्य शुद्ध यानी साफ हो जाता है।
8. चोबचीनी : चोबचीनी, सोठ, मोचरस, दोनों मूसली, काली मिर्च, वायविडंग और सौंफ सबको बराबर भाग में लेकर चूर्ण बनायें। बाद में 10 ग्राम की मात्रा में रोज खाकर ऊपर से मिश्री मिला दूध पी लें इससे वीर्य साफ होता है।
9. सांठी : सांठी की जड़ और काली मिर्च को पीसकर घी के साथ मिलाकर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।
10. जायफल :
11. राल : राल को बारीक पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम पानी से वीर्य के रोग में सेवन करें।
12. दालचीनी :
13. वंशलोचन : वीर्य दोष दूर करने के लिए वनंशलोचन 30 ग्राम और छोटी इलायची 3 ग्राम पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम घी व खांड़ में मिलाकर लें।
14. इमली :
16. कीकर :
18. सिम्बल : सिम्बल की जड़ 100 ग्राम कूटछान कर इसमें खांड़ 100 ग्राम मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम गर्म दूध के साथ प्रयोग करने से वीर्य दोष दूर होते हैं।
19. असगंध नागोरी :
21. फिटकरी : 30 ग्राम भुनी फिटकरी को 60 ग्राम खांड़ में मिलाकर रखें। 3-3 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।
22. कमलगट्ठा : कमल गट्ठा या बीज पीसकर शहद में मिलाकर नाभि पर लेप करने से वीर्य स्तम्भन हो जायेगा।
23. सफेद कनेर : सफेद कनेर की जड़ 2 अंगुल की कमर में बांधने से वीर्य स्तम्भन हो जाता है।
24. सौंठ : सौंठ, बूटी हजारदाना, नकछिकनी 50-50 ग्राम कूट छान कर 5-5 ग्राम सुबह-शाम कम गर्म दूध से लें। सौंठ, सतावर, गोरखमुण्डी 10-10 ग्राम पीसकर शहद मिला कर चने कें बराबर गोलियां बनाकर छायां में सुखा लें। सुबह और शाम भोजन के बाद 1-1 गोली दूध या पानी के साथ लें। वीर्य दोष में लाभ मिलेगा।
25. असगंध :
27. मुनक्का : 250 मिलीलीटर दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड़ मिला कर सुबह पीये।
28. कालीमिर्च : कालीमिर्च के साथ गोंदी के पत्ते मिलाकर घोटकर शर्बत की तरह 21 दिन तक पीने से वीर्य पुष्ट होता है।
29. गंगेरन : गंगेरन की जड़ की छाल के चूर्ण में उसी मात्रा में मिश्री मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा दूध के साथ 7 दिनों तक खायें वीर्य पुष्ट होता है।
30. बदुफली : बदुफली के पौधे को थोडे पानी के साथ पीसकर कपड़े में छानकर रस को निकाल लें। 100 मिलीलीटर रस में 10 ग्राम शक्कर और आधे से एक ग्राम पीपल का चूर्ण मिलाकर 7 दिनों तक सुबह-शाम पीने से वीर्य बढ़ता है।
31. बरगद :
32. विधारा : 100 ग्राम विधारा की जड़ को 1 लीटर दूध में पकाकर और घी मिलाकर रख लें। भोजन के बाद रोज 20 ग्राम की मात्रा में खाने से वीर्य (धातु) पुष्ट होता है।
33. केला :
35. निर्गुण्डी : निर्गुण्डी, सालम मिश्री, तालमखाना, शतावरी और विदारीकन्द 40-40 ग्राम को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। 20 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम दूध में मिलाकर इलायची से मथकर सुबह-शाम पीने से वीर्य की वृद्धि होती है।
36. बेर : बेर की मिंगी की गुठली को गुड़ के साथ खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।
37. गोरखमुण्डी : गोरखमुण्डी के फूलो को पीसकर प्राप्त चूर्ण में शक्कर को मिलाकर खाने से वीर्य पुष्ट होता है।
38. जवाखार : 1 ग्राम जवाखार में 10 ग्राम शक्कर में मिलाकर पानी के साथ खाने से पेशाब के बाद वीर्य का गिरना रुक जाता है।
39. गिलोय : गिलोय का सत और असली वशंलोचन बराबर लेकर चूर्ण बना लें। 2 ग्राम की मात्रा में शहद को मिलाकर 7 दिनों खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।
40. सत्यानाशी : सत्यानाशी की जड़ की छाल लगभग ग्राम से 1 ग्राम तक दूध के साथ लेने से वीर्य-सम्बन्धी सभी रोग मिट जाते है।
41. अफीम : अफीम 0.3 ग्राम के घोल में एक मुठ्ठी चने भिगोकर सुबह-शाम अंकुरित होने पर 1-1 चना चबा लें। केवल 21 दिन तक यह प्रयोग करने से स्वप्नदोष, धातु (वीर्य) कमी दूर होती है।
42. बड़ी गोखरू : बड़ी गोखरू की कांटी बनाकर खाने से वीर्य-सम्बन्धी सारे रोग दूर होते हैं।
43. कपूर : लगभग एक ग्राम का चौथा भाग कपूर और अफीम की गोली बनाकर रात को सोते समय खाने से वीर्य-सम्बन्धी रोग मिट जाते हैं।
44. महुआ : महूए की छाल का 2 से 3 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार-सुबह और शाम को गाय के घी, दूध, और चीनी के साथ पीने से पुरूष के वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है।
45. चना :
48. आंवला : 1 चम्मच घी में 2 चम्मच आंवले का रस मिलाकर दिन में 3 बार कम-से-कम 7 दिनों तक सेवन करने से लाभ होता है।
49. मुलहठी : 3 ग्राम मुलहठी जड़ (मूल) का चूर्ण, 3 ग्राम घी और 2 ग्राम शहद दिन में 3 बार धातुक्षय के रोग में सेवन करें।
50. छोंकर : छोंकर और किंकिरात के फूलों को बराबर मात्रा में लेकर थोड़े से जीरे के साथ पीसकर उसे लगभग 250 ग्राम पानी में डालकर छान लें। इसके बाद उसमें 20 ग्राम चीनी पीने से धातु की पुष्टि होती है।
51. चीकू : चीकू को शर्करा के साथ खाने से धातुपुष्टि होती है।
52. दूध :
53. कालीमिर्च : 1 गिलास दूध में 8 से 10 कालीमिर्च का चूर्ण डालकर अच्छी तरह उबालें। फिर ठंड़ा करके सुबह-शाम रोज खानें से वीर्य की पुष्टी होती है।
54. गेहूं : 100 ग्राम गेहूं रात को पानी में भिगोकर रख दें। सुबह के समय उसी पानी से उन्हें पत्थर पर पीसने के बाद लस्सी बना लें। इसमें स्वाद के लिए चीनी मिला लें। पेशाब के साथ वीर्य के आने का रोग सिर्फ 7 दिन तक यह प्रयोग करने से दूर हो जाता है।
55. कनेर : कनेर की जड़ को घिसकर लिंग पर लेप करने से धातु रोग व गर्मी से होने वाले रोग में लाभ होता है।
56. कसौंदी : कसौंदी के जड़ का बारीक चूर्ण 1-4 ग्राम की मात्रा में 5-10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम एक गिलास दूध के साथ लेने से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य बढता है और धातु का क्षय रोग भी ठीक हो जाता है।
57. अलसी : अलसी का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिसरी मिलाकर दो बार नियमित रूप से दूध के साथ कुछ हफ्ते तक पीने से वीर्य बढ़ता है।
58. कालीमिर्च : कालीमिर्च और शहद के साथ तीसी का सेवन कामोद्दीपक तथा वीर्य को गाढ़ा करने वाला होता है।
59. सेहुण्ड : गीली शतावर को चीरकर बीच के तिनके को निकाल कर दूध के साथ पिसी मिश्री मिलाकर खाने से वीर्य बढ़ता है।
60. खजूर :
61. अमरूद : अच्छी तरह पके नरम, मीठे अमरूदों को मसलकर दूध में फेंट लें और फिर छानकर इनके बीज को निकालकर उसमें आवश्यकतानुसार चीनी मिलाकर सुबह नियमित रूप से 21 दिन सेवन करें।
62. पीपल :
63. लता करंज : करंज के पत्तों का रस हथेली और तलुओं पर मालिश करने से वीर्य गाढ़ा होता है। इसके एक बीज को सहवास के समय मुंह में चबाने से भी वीर्य गाढ़ा होता है।
64. पानी : ठंडे पानी से नहाने से स्वप्नदोष और वीर्य के रोगों में लाभ होता है।
65. अंजीर : सूखे अंजीर के टुकड़ों एवं बादाम के गर्भ को गर्म पानी में भिगोकर रख दें फिर ऊपर से छिलके निकालकर सुखा दें। उसमें मिश्री, इलायची दानों का चूर्ण, केसर, चिरौंजी, पिश्ता और बलदाने कूटकर डालें और गाय के घी में 8 दिन तक भिगोकर रखें। यह मिश्रण प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम की मात्रा में खाने से क्षीण शक्ति वालों के खून और वीर्य में वृद्धि होती है।
66. इलायची :
वीर्य ही शरीर की सप्त धातुओं का राजा माना जाता है और ये सप्त धातुयें भोजन से प्राप्त होती हैं। इसमे सातवी धातु ही पुरुष में वीर्य बनती है। 100 बूंद खून से एक बूंद वीर्य बनता है। एक महीने में लगभग 1 लीटर खून बनता है जिससे 25 ग्राम वीर्य बनता है और गर्भाधान के लिए 60 से 70 करोड़ जीवित शुक्राणुओं का होना जरूरी होता है। इसलिए संभोग हफ्ते में एक बार ही करना चाहिए क्योंकि एक बार के संभोग के दौरान 10 ग्राम वीर्य निकल जाता है। वीर्य में जीवित शुक्राणुओं की कमी से महिलाओं को गर्भवती भी बनाया नहीं जा सकता। वीर्य परीक्षण में वीर्य गर्भाधान के लिए 7.8 पी.एच से 8.2 पी. एच ही सही माना गया है। वीर्य में दो प्रकार के शुक्राणु होते हैं एक्स और वाई। एक्स शुक्राणुओं से पुत्री पैदा होती है और वाई शुक्राणुओं से पुत्र पैदा होता है। एक शुक्राणु की लम्बाई लगभग 1/500 इंच होती है।परिचय :
कभी-कभी वीर्य पतला होने के कारण गर्भ नहीं ठहरा पाता ऐसा तब होता है जब कोई ज्यादा मैथुन करके वीर्य को नष्ट कर देता है या अन्य दूसरी किसी बीमारी से ग्रस्त होकर जैसे:- प्रमेह, सुजाक, मूत्रघात, मूत्रकृच्छ और स्वप्नदोष आदि।चिकित्सा :
1. ब्राह्मी : ब्राह्मी, शंखपुष्पी, खरैटी, ब्रह्मदण्डी और कालीमिर्च को पीसकर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।
2. बबूल :
बबूल की कच्ची फली को सुखाकर मिश्री में मिलाकर खाने से वीर्य की कमी व रोग दूर होते हैं।
10 ग्राम बबूल की कोंपलों को 10 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पानी के साथ लेने से वीर्य-रोगों में लाभ होता है। हरी कोंपले न हों तो 30 ग्राम सूखी कोंपलों का सेवन कर सकते हैं।
बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीसकर रख लें। एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से जल के साथ सेवन से करने से वीर्य गाढ़ा होगा और सभी विकार दूर हो जाएंगे।
बबूल की गोंद को घी में तलकर उसका पाक बनाकर खाने से पुरुषों का वीर्य बढ़ता है और प्रसूत काल स्त्रियों को खिलाने से उनकी शक्ति भी बढ़ती है।
बबूल का पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) लेकर पीस लें, और आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से कुछ ही समय में लाभ मिलता है।
बबूल की कच्ची फलियों के रस में 1 मीटर लंबे और 1 मीटर चौडे़ कपड़े को भिगोकर सुखा लेते हैं। एक बार सूख जाने पर उसे पुन: भिगोकर सुखाते है। इसी प्रकार इस प्रक्रिया को 14 बार करते हैं। इसके बाद उस कपड़े को 14 भागों में बांट लेते है, और प्रतिदिन एक टुकड़े को 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर पीने से धातु की पुष्टि हो जाती है।
4. गूलर :
5. धनिया : धनिया, पोस्त के बीज के साथ मिश्री मिलाकर खाना लाभदायक होता है।
6. छोटी दुधी : छोटी दुधी का चूर्ण मिश्री मिलाकर दूध के साथ खायें इससे वीर्य शुद्ध होता जाता है।
7. तालमखाना : तालमखाना मे मिश्री मिलाकर खाने से वीर्य शुद्ध यानी साफ हो जाता है।
8. चोबचीनी : चोबचीनी, सोठ, मोचरस, दोनों मूसली, काली मिर्च, वायविडंग और सौंफ सबको बराबर भाग में लेकर चूर्ण बनायें। बाद में 10 ग्राम की मात्रा में रोज खाकर ऊपर से मिश्री मिला दूध पी लें इससे वीर्य साफ होता है।
9. सांठी : सांठी की जड़ और काली मिर्च को पीसकर घी के साथ मिलाकर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।
10. जायफल :
जायफल, जावित्री, माजूफल मस्तगी, नागकेसर, अकरकरा, मोचरस, वनशलोचन, अजवायन, छोटी इलायची दाना 10-10 ग्राम कूट कर छान लें। कीकर की गोंद में चने बराबर गोलियां बना छाया में सूखा लें। 1-1 गोली सुबह-शाम दूध या पानी से लें।
जायफल 1 ग्राम रूमीमस्तगी, लौंग, छोटी इलायची दाना 2-2 ग्राम पीसकर शहद में मिलाकर चने के बराबर गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें, संभोग (सहवास) से 2 घंटे पहले एक गोली गर्म दूध से लें।
12. दालचीनी :
दालचीनी 20 ग्राम पीसकर इसमें खांड़ 20 ग्राम मिलाकर 2-2 ग्राम की मात्रा मे सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
दालचीनी और काले तिल 5-5 ग्राम पीस लें उसके बाद शहद में मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें और छाया में सुखा दें। संभोग से 2 घंटे पहले एक गोली गर्म दूध से लें।
3 ग्राम दालचीनी का चूर्ण रात में सोते समय गरम दूध के साथ खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।
दालचीनी को बहुत ही बारीक पीस लेते हैं। इसे 4-4 ग्राम सुबह व शाम को सोते समय दूध से फांके। इससे दूध पच जाता है और वीर्य की वृद्धि होती है।
14. इमली :
15. लाजवन्ती : लाजवन्ती को संभोग के समय मुंह में रखने से वीर्य स्तंभन हो जाता है।
16. कीकर :
17. राई : राई, लौंग 5-5 ग्राम दालचीनी 10 ग्राम पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम दूध से लें।
18. सिम्बल : सिम्बल की जड़ 100 ग्राम कूटछान कर इसमें खांड़ 100 ग्राम मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम गर्म दूध के साथ प्रयोग करने से वीर्य दोष दूर होते हैं।
19. असगंध नागोरी :
20. वंशलोचन : 60 ग्राम वंशलोचन को पीसकर रखें। इसमें 40 ग्राम खांड़ मिलाकर रख लें। 5-5 ग्राम को सुबह-शाम दूध के साथ लेने से लाभ होता है।
21. फिटकरी : 30 ग्राम भुनी फिटकरी को 60 ग्राम खांड़ में मिलाकर रखें। 3-3 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।
22. कमलगट्ठा : कमल गट्ठा या बीज पीसकर शहद में मिलाकर नाभि पर लेप करने से वीर्य स्तम्भन हो जायेगा।
23. सफेद कनेर : सफेद कनेर की जड़ 2 अंगुल की कमर में बांधने से वीर्य स्तम्भन हो जाता है।
24. सौंठ : सौंठ, बूटी हजारदाना, नकछिकनी 50-50 ग्राम कूट छान कर 5-5 ग्राम सुबह-शाम कम गर्म दूध से लें। सौंठ, सतावर, गोरखमुण्डी 10-10 ग्राम पीसकर शहद मिला कर चने कें बराबर गोलियां बनाकर छायां में सुखा लें। सुबह और शाम भोजन के बाद 1-1 गोली दूध या पानी के साथ लें। वीर्य दोष में लाभ मिलेगा।
25. असगंध :
26. बहमन : बहमल लाल 50 ग्राम पीसकर 5 ग्राम को सुबह कम गर्म दूध के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति बढ़ती है।
27. मुनक्का : 250 मिलीलीटर दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड़ मिला कर सुबह पीये।
28. कालीमिर्च : कालीमिर्च के साथ गोंदी के पत्ते मिलाकर घोटकर शर्बत की तरह 21 दिन तक पीने से वीर्य पुष्ट होता है।
29. गंगेरन : गंगेरन की जड़ की छाल के चूर्ण में उसी मात्रा में मिश्री मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा दूध के साथ 7 दिनों तक खायें वीर्य पुष्ट होता है।
30. बदुफली : बदुफली के पौधे को थोडे पानी के साथ पीसकर कपड़े में छानकर रस को निकाल लें। 100 मिलीलीटर रस में 10 ग्राम शक्कर और आधे से एक ग्राम पीपल का चूर्ण मिलाकर 7 दिनों तक सुबह-शाम पीने से वीर्य बढ़ता है।
31. बरगद :
बरगद के फल को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें। गाय के दूध के साथ 1 चम्मच चूर्ण खाने से वीर्य गाढ़ा व बलवान बनता है।
बरगद की कोंपल 10 ग्राम, गूलर की छाल 10 ग्राम, शक्कर 20 ग्राम को मिलाकर चूर्ण बना लें। 21 दिन तक 10 ग्राम चूर्ण दूध के साथ खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।
25 ग्राम बरगद की कोपले लेकर 250 मिलीलीटर पानी में पकायें। जब एक चोथाई पानी बचे तो इसे छानकर 500 मिलीलीटर दूध में डालकर पकायें। इसमें 6 ग्राम ईसबगोल की भूसी और 6 ग्राम शक्कर मिलाकर सिर्फ 7 दिन तक पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है।
बरगद के दूध की 5-7 बूंदे बताशे में भरकर खाने से वीर्य के शुक्राणु बढ़ते है।
33. केला :
34. इन्द्रायण : इन्द्रायण की गिरी को पानी के साथ खाने से वीर्य पुष्ट होता है।
35. निर्गुण्डी : निर्गुण्डी, सालम मिश्री, तालमखाना, शतावरी और विदारीकन्द 40-40 ग्राम को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। 20 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम दूध में मिलाकर इलायची से मथकर सुबह-शाम पीने से वीर्य की वृद्धि होती है।
36. बेर : बेर की मिंगी की गुठली को गुड़ के साथ खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।
37. गोरखमुण्डी : गोरखमुण्डी के फूलो को पीसकर प्राप्त चूर्ण में शक्कर को मिलाकर खाने से वीर्य पुष्ट होता है।
38. जवाखार : 1 ग्राम जवाखार में 10 ग्राम शक्कर में मिलाकर पानी के साथ खाने से पेशाब के बाद वीर्य का गिरना रुक जाता है।
39. गिलोय : गिलोय का सत और असली वशंलोचन बराबर लेकर चूर्ण बना लें। 2 ग्राम की मात्रा में शहद को मिलाकर 7 दिनों खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।
40. सत्यानाशी : सत्यानाशी की जड़ की छाल लगभग ग्राम से 1 ग्राम तक दूध के साथ लेने से वीर्य-सम्बन्धी सभी रोग मिट जाते है।
41. अफीम : अफीम 0.3 ग्राम के घोल में एक मुठ्ठी चने भिगोकर सुबह-शाम अंकुरित होने पर 1-1 चना चबा लें। केवल 21 दिन तक यह प्रयोग करने से स्वप्नदोष, धातु (वीर्य) कमी दूर होती है।
42. बड़ी गोखरू : बड़ी गोखरू की कांटी बनाकर खाने से वीर्य-सम्बन्धी सारे रोग दूर होते हैं।
43. कपूर : लगभग एक ग्राम का चौथा भाग कपूर और अफीम की गोली बनाकर रात को सोते समय खाने से वीर्य-सम्बन्धी रोग मिट जाते हैं।
44. महुआ : महूए की छाल का 2 से 3 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार-सुबह और शाम को गाय के घी, दूध, और चीनी के साथ पीने से पुरूष के वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है।
45. चना :
46. आम :
47. जामुन : वीर्य का पतलापन हो, जरा सी उत्तेजना से ही वीर्य का निकल जाना हो तो ऐसे में 5 ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण रोज शाम को गर्म दूध से लें। वीर्य का पतलापन की बीमारी दूर होती है और वीर्य भी बढ़ जाता है।
48. आंवला : 1 चम्मच घी में 2 चम्मच आंवले का रस मिलाकर दिन में 3 बार कम-से-कम 7 दिनों तक सेवन करने से लाभ होता है।
49. मुलहठी : 3 ग्राम मुलहठी जड़ (मूल) का चूर्ण, 3 ग्राम घी और 2 ग्राम शहद दिन में 3 बार धातुक्षय के रोग में सेवन करें।
50. छोंकर : छोंकर और किंकिरात के फूलों को बराबर मात्रा में लेकर थोड़े से जीरे के साथ पीसकर उसे लगभग 250 ग्राम पानी में डालकर छान लें। इसके बाद उसमें 20 ग्राम चीनी पीने से धातु की पुष्टि होती है।
51. चीकू : चीकू को शर्करा के साथ खाने से धातुपुष्टि होती है।
52. दूध :
सुबह नाश्ते में एक केला, 10 ग्राम देशी घी के साथ खाकर ऊपर से दूध पी लें। दोपहर के बाद 2 केले, 29 ग्राम खजूर को 1 चम्मच देशी घी में डालकर खाकर ऊपर से दूध पीयें। धातुपुष्टि होती है।
ताजा दूध निकालकर छानकर बिना गर्म किये ही उसके अन्दर मिश्री या शहद और भिगोई हुई किशमिश का पानी मिलाकर लगातार 40 दिन पीने से पुरुष का वीर्य बढ़ता है तथा आंखों की रोशनी भी तेज होती है। यह दूध खांसी, स्नायुदौर्बल्य (नरवस सिस्टम), बच्चों का सूखा रोग, क्षय रोग (टी.बी) हिस्टीरिया हृदय की धड़कन आदि रोगों में भी बहुत उपयोगी है। छोटे-छोटे कमजोर बच्चों को यह दूध पीने से लाभ मिलता है।
54. गेहूं : 100 ग्राम गेहूं रात को पानी में भिगोकर रख दें। सुबह के समय उसी पानी से उन्हें पत्थर पर पीसने के बाद लस्सी बना लें। इसमें स्वाद के लिए चीनी मिला लें। पेशाब के साथ वीर्य के आने का रोग सिर्फ 7 दिन तक यह प्रयोग करने से दूर हो जाता है।
55. कनेर : कनेर की जड़ को घिसकर लिंग पर लेप करने से धातु रोग व गर्मी से होने वाले रोग में लाभ होता है।
56. कसौंदी : कसौंदी के जड़ का बारीक चूर्ण 1-4 ग्राम की मात्रा में 5-10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम एक गिलास दूध के साथ लेने से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य बढता है और धातु का क्षय रोग भी ठीक हो जाता है।
57. अलसी : अलसी का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिसरी मिलाकर दो बार नियमित रूप से दूध के साथ कुछ हफ्ते तक पीने से वीर्य बढ़ता है।
58. कालीमिर्च : कालीमिर्च और शहद के साथ तीसी का सेवन कामोद्दीपक तथा वीर्य को गाढ़ा करने वाला होता है।
59. सेहुण्ड : गीली शतावर को चीरकर बीच के तिनके को निकाल कर दूध के साथ पिसी मिश्री मिलाकर खाने से वीर्य बढ़ता है।
60. खजूर :
ठंड में सुबह खजूर को घी में सेंककर खिलायें इस पर इलायची, शक्कर और कौंच को डालकर उबाले हुऐ दुध को पीने से वीर्य बढ़ता है।
अच्छा छुहारा लेकर, बीज निकालकर थोडा-सा कूटकर उसमें बादाम, बलदाने, पिश्ता, चिरौंजी, शक्कर आदि मिलाएं। इसे 8 दिन तक घी में मिलाकर रख दें। उसमें से रोज 20 ग्राम खाने से धातु पुष्टि होती है और पित्त को शान्त करता है।
62. पीपल :
पीपल के फल को पीसकर आधा चम्मच की मात्रा में 1 कप दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करते रहने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होकर बल, वीर्य (धातु) और पौरुष शक्ति बढ़ती है।
100 ग्राम पवांड़ (चक्रमर्द) के फूल और 10 ग्राम चीनी को मिलाकर रोजाना सुबह खाने से कुछ ही दिनों मे वीर्य का रोग समाप्त हो जाता है।
पीपल के तने की 50 ग्राम सूखी छाल की राख, उपदंश पर छिड़कने से धातु (उपदंश) शुष्क होकर ठीक हो जाता है।
64. पानी : ठंडे पानी से नहाने से स्वप्नदोष और वीर्य के रोगों में लाभ होता है।
65. अंजीर : सूखे अंजीर के टुकड़ों एवं बादाम के गर्भ को गर्म पानी में भिगोकर रख दें फिर ऊपर से छिलके निकालकर सुखा दें। उसमें मिश्री, इलायची दानों का चूर्ण, केसर, चिरौंजी, पिश्ता और बलदाने कूटकर डालें और गाय के घी में 8 दिन तक भिगोकर रखें। यह मिश्रण प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम की मात्रा में खाने से क्षीण शक्ति वालों के खून और वीर्य में वृद्धि होती है।
66. इलायची :
67. अतीस : 5 ग्राम अतीस के चूर्ण को शक्कर और दूध के साथ देने से वीर्य बढ़ता है।
स्वप्नदोष (NIGHT FALL)
स्वप्नदोष
रात के समय सोते हुए अपने आप या अश्लील स्वप्न देखते हुए वीर्य का निकल जाना ही स्वप्नदोष कहलाता है।परिचय :
त्रिफले का चूर्ण और शहद दोनों को मिलाकर खाने से स्वप्नदोष में बहुत लाभ होता है।
त्रिफला का चूर्ण 4-6 ग्राम की मात्रा में रात को सोने से पहले दूध के साथ खाने से स्वप्नदोष दूर हो जाता है।
त्रिफला 12 ग्राम, गुड़ 24 ग्राम, वच और भीमसेनी कर्पूर 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर सबको पानी के साथ मिलाकर छोटी-छोटी एक समान गोली बना लें, 1 से 2 गोलीयों को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष व शीघ्रपतन दूर हो जायेगा।
शतावर, मूसली, विदारीकन्द, असगंध, गोखरू या इलायची के बीज इनमें से 2-3 वनौशधि को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर पीसकर रख लें, और मिश्री को मिलाकर 3 ग्राम पानी के साथ पीने से लाभ होता है।
शतावरी, असगंध, विधारा 20-20 ग्राम कूटकर छानकर रख लें, इसमें 60 ग्राम खांड़ मिलाकर 10-20 ग्राम की मात्रा में दिन सुबह-शाम दूध के साथ लें।
शतावर के रस को शहद मे मिलाकर पीने सुबह-शाम से स्वप्नदोष दूर होता है।
गुलाब के फूल और छोटी दूधी का चूर्ण बराबर मिश्री मिलाकर पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष के दोष को खत्म करता है।
गुलाब के 4-5 फूल तोड़कर उन्हे साफ पानी से धोयें और पंखुड़ियां अलग करके उनमें उतनी ही मिश्री का चूर्ण मिला कर सुबह-शाम खाकर और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें। इसका प्रयोग कुछ दिनों तक कर सकते हैं।
गुलाब का शर्बत पीने से भी स्वप्नदोष पर लाभ मिलता है।
2 ग्राम धनिये को पीसकर उसमें 3 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर कुछ दिनों तक पानी के साथ पीने से स्वप्नदोष का रोग खत्म होता है।
सूखे धनिये तथा मिश्री को बराबर मात्रा में कूटकर चूर्ण बना लें और किसी ढक्कनदार बर्तन में भरकर रख दें। इस चूर्ण में से 5-6 ग्राम के लगभग, ताजा जल के साथ सुबह-शाम कुछ दिनों तक लेने से अनैच्छिक वीर्यपात, स्वप्दोष आदि विकारों से मुक्ति मिल जाती है।
सूखा धनिया कूट, पीसकर छान लें। इसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई चीनी मिला लें। सुबह खाली पेट बासी पानी से 1 चम्मच की फंकी लें और 1 घण्टे तक कुछ न खायें, पीयें। इसी तरह 1-1 खुराक शाम को 5 बजे सुबह के पानी के साथ लें। अगर कब्ज हो तो रात को सोने के समय 2 चम्मच ईसबगोल की भूसी गरम दूध से लें। इससे स्वप्नदोष की बीमारी दूर हो जाती है।
धनियां, नीलोफर, कुर्फा के बीज, काहू के बीज,कासनी के बीज और शीतलचीनी 20-20 ग्राम, अलसी के दाने 100 ग्राम और ईसबगोल 25 ग्राम की मात्रा में सबको कूट कर छान लें। फिर इस चूर्ण से 2-3 ग्राम की मात्रा मे लेकर बराबर भाग में मिश्री को मिलाकर पानी के साथ सुबह-शाम लें।
बड़ी गोखरू की फांट या घोल को सुबह-शाम प्रयोग करने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।
बड़ी गोखरू के फल का 25 ग्राम चूर्ण 250 मिलीलीटर उबलते पानी में डालकर छोड़ दें। 1 घंटे बाद छान लें। इसमें से थोड़ा-सा बार-बार पिलाने से स्वप्नदोष दूर होता है।
शक्कर और घी बड़ी गोखरू के साथ खायें और ऊपर से दूध पी लें इससे भी स्वप्नदोष में लाभ होता है।
छिरेंहटी के सूखे पत्ते 50 ग्राम, हरड़, बहेड़ा और आमला 20-20 ग्राम, बबूल का गोंद 25 ग्राम और कतीरा गोंद 10 ग्राम। सबको कूट छान कर छिरेंहटा के ही रस में खरल करके, बारीक चूर्ण के रूप में ही शीशी में भर कर रखें। 5-6 ग्राम यह चूर्ण ताजा पानी के साथ सुबह-शाम खाने से स्वप्नदोष और वीर्य की कमी को दूर होती है।
छिरेंहटी के सूखे पत्ते 200 ग्राम तथा गाय के घी के साथ भूनी हुई छोटी हरड़ 50 ग्राम को पीस-छान कर दोनों के बराबर मिश्री मिला ले और 10-15 ग्राम की मात्रा में लेकर सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे स्वप्नदोष मे लाभ होता है।
छिरेंहटी का पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) सूखे हुए 50 ग्राम, सूखी हुई दुर्बा 25 ग्राम, छोटी इलायची के बीज और कतीरा गोंद 12-12 ग्राम तथा मिश्री 100 ग्राम आदि को एक साथ लेकर अच्छी तरह से कूट लें। फिर इस बने चूर्ण को 10-12 ग्राम सुबह-शाम गाय के गर्म दूध के साथ खायें। इससे प्रमेहजन्य (वीर्य विकार से उत्पन्न रोग) अनेक उपसर्ग दूर होते हैं। वीर्य का पतलापन और स्वप्नदोष दूर होता है।
छिरेंहटी के हरे पत्ते 10-12 ग्राम और 5-6 काली मिर्च लेकर बारीक पीस लें। चाहे तो बादाम की छिली हुई मींगियां और सौंफ भी मिला सकते है। रोज कुछ दिनों तक खाने से लाभ मिलता है।
छिरेंहटी का रस और गिलोय का रस बराबर भाग लेकर उसके साथ शहद मिला लें और खायें इससे शीघ्रपतन और स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।
छिरेंहटी को आमले के रस में खरल करके मिश्री या शहद के साथ मिलाकर 15-20 ग्राम की मात्रा में लेकर स्वप्नदोष के रोगी को खिलायें।
छिरेंहटी छाया में सुखा कर चूर्ण कर लें और कतीरा के गोद में 12 घंटे डुबोकर 1 ग्राम की गोली बनाकर 12 घंटे छाया में सुखा लें। 1 से 2 गोली को खुराक के रूप में ताजा पानी के साथ, सुबह-शाम खाने से लाभ मिलेगा।
वंशलोचन का चूर्ण बनाकर 1-2 ग्राम को सुबह-शाम गाय के दूध के साथ 40 दिनों तक खाने से लाभ मिलता है।
वंशलोचन, शुद्ध शिलाजीत छोटी इलायची, सफेद मिर्च, मस्तंगी, शीतलचीनी, कुन्दरू, राल और हल्दी 10-10 ग्राम लेकर, चंदन के तेल के साथ कूट लें और मटर के बराबर गोली बना कर रोज 1-2 गोली ताजा पानी के साथ सुबह-शाम खाने से स्वप्नदोष मिट जाता है। साथ ही पेशाब के संग आने वाला घात, पेशाब की रुकावट आदि भी दूर होती है।
वंशलोचन और शिलाजीत 40-40 ग्राम लेकर पीसकर रखें, फिर इसमें 10 ग्राम सत गिलोय को मिलाकर 1-2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ रोगी को सुबह-शाम सेवन करके ऊपर से मिश्री मिलाकर दूध पिलाने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।
शिश्न चर्म रोग
शिश्न चर्म रोग
2. नीम : नीम के तेल और तिल के तेल को मिलाकर लिंग की मालिश करने से लिंग के आगे ढकने वाली खाल खुलने लगती है।
3. हरी घास : लिंग की खाल को खींचकर उस पर हरी घास, हल्दी और नीम के पत्तों से प्राप्त रस की मालिश करने से लिंग की आगे की खाल हट जाती है।
4. कबीला : लिंग के आगे की खाल हटाने के लिए कबीला (कमीला) के तेल में घोलकर लगाया करें। इससे लिंग के आगे का भाग जो (खाल से ढका हुआ होता है) बाहर निकल आता है।
5. नमक : लिंग का परदा हटाने के लिए पानी में नमक घोल कर इसमें लिंग को डुबायें और घोल की धार लिंग के पर्दे पर गिरायें इससे लिंग का परदा हट जाता है।
लिंग के अगले भाग को सुपारी कहते हैं। लिंग का अगला भाग (सुपारी) खाल से ढका होता है। जब इस ढकी हुई खाल (आवरण) को हम पीछे की ओर करते हैं तो लिंग का अगला भाग (सुपारी) नंगा हो जाता है। यह चर्म (खाल) जब खुल नहीं पाता है तो इसे लिंग या शिश्न चर्म संकोच कहते हैं।परिचय :
चिकित्सा :
1. कपूर : तीसी के तेल में कपूर को मिलाकर लिंग की मालिश करने से लिंग के अगले भाग की त्वचा (खाल) खुल जाती है। क्योंकि तीसी तेल से तंतुओं को ढीला करने की क्षमता मिलती है।2. नीम : नीम के तेल और तिल के तेल को मिलाकर लिंग की मालिश करने से लिंग के आगे ढकने वाली खाल खुलने लगती है।
3. हरी घास : लिंग की खाल को खींचकर उस पर हरी घास, हल्दी और नीम के पत्तों से प्राप्त रस की मालिश करने से लिंग की आगे की खाल हट जाती है।
4. कबीला : लिंग के आगे की खाल हटाने के लिए कबीला (कमीला) के तेल में घोलकर लगाया करें। इससे लिंग के आगे का भाग जो (खाल से ढका हुआ होता है) बाहर निकल आता है।
5. नमक : लिंग का परदा हटाने के लिए पानी में नमक घोल कर इसमें लिंग को डुबायें और घोल की धार लिंग के पर्दे पर गिरायें इससे लिंग का परदा हट जाता है।
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