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आमाशय का घाव
आमाशय का घाव
(ULCER OF STOMACH)
काफी लम्बे समय तक
पेट में दर्द
,
पाचनतंत्र
से सम्बंधी बीमारी,
अम्लरोग
,
गैस्ट्रिक
आदि कारणों से आमाशय में जख्म या घाव हो जाता है। आमाशय का जख्म 2 प्रकार का होता है- द्रव शूल, परिणाम शूल।
परिचय :
विभिन्न भाषाओं में नाम :
हिंदी
पेट का घाव।
अंग्रेजी
पेप्टिक अल्सर या गेस्ट्रिक अल्सर।
बंगाली
आमाशय व्रण।
अरबी
पाकस्थलिघा।
डोगरी
कलेजा दर्द।
कन्नड़ी
होटे हुत्रु।
मलयालम
कुटाल पुत्रु।
मराठी
आमाशयतिल व्रणे।
तमिल
वलि गुनमम्।
तेलगू
जीर्णपुण्डेयु।
लक्षण :
द्रव शूल :
गलत खान-पान
से आमाशय में जमा द्रव धीरे-धीरे आमाशय में जख्म बना देता है जिससे पेट में तेज दर्द पैदा होता है। इस रोग में रोगी को भोजन करने के तुरंत बाद दर्द होने लगता है। इस तरह भोजन करने के बाद दर्द होने पर
उल्टी
आ जाने के बाद दर्द शांतहो जाता है।
परिणाम शूल :
परिणाम शूल
ग्रहणी
के शुरुआती भाग (डयूडिनम) में जख्म होने के कारण उत्पन्न होता है। इस रोग में खाना खाने के 3 से 4 घंटे बाद दर्द,
जलन
और उल्टी आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।
भोजन और परहेज :
दूध
से बनी चीजे,
गेहूं
से बनी चीजे, छोटे और पके
केले
व अन्य प्रकार के द्रव का सेवन करना लाभकारी होता है।
अम्ल, कटु,
नमक
, रस, तले हुए पदार्थ, मसाले,
शराब
,
चावल
और
सोंठ
का सेवन करना आमाशय के रोग से पीड़ित रोगी के लिए हानिकारक होता है।
विभिन्न
औषधियों
से
उपचार
:
1. मजीठ :
मजीठ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 3 बार पानी के साथ पिलाने से आमाशय का जख्म ठीक होता है।
2. रसौत
:
रसौंत का चूर्ण आध से 2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन मक्खन के साथ सुबह-शाम लेने से आमाशय का घाव समाप्त होता है।
3. गुग्गुल
:
गुग्गुल की आधे से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय का घाव व दूषित द्रव्य समाप्त होता है।
4. गोंद
:
गोंद में तारपीन के तेल की 3 से 10 बूंदों को मिलाकर चीनी की बनी हुई शर्बत के साथ सेवन करने से आमाशय के जख्म में होने वाला खून के बहाव या आंतरिक बहाव को रोकता है।
5. धऊंला (
प्रियंगु)
:
धऊंला का गूदा एक चौथाई से आधा ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से गैस्ट्रिक अल्सर ठीक होता है।
6. बांदा
:
बांदा (बांझी) आधे से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय का घाव धीरे-धीरे ठीक हो जाता है।
7. बिहीदाना
:
बिहीदाना के बीजों को पानी के साथ उबालकर घोल बना लें और इसमें 40 से 80 मिलीलीटर तक की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय का जख्म व दर्द ठीक होता है।
8. तुम्बरू
:
तुम्बरू (तेजफल) का सूखा चूर्ण एक चौथाई से आधा ग्राम की मात्रा में लेने से आमाशय का घाव, दर्द व अन्य परेशानी दूर होती है।
9. सत्यानाशी
:
सत्यानाशी (पीला धतूरा) की पीसी हुई जड़ 5 से 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ लेने से खाने के बाद होने वाला आमाशय के जख्म का दर्द ठीक होता है।
10. समुद्री
नमक :
समुद्री नमक खाने से आमाशय की बीमारी समाप्त होती है।
11. मुलहठी
:
मुलहठी की जड़ को पीसकर 4 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ दिन में 3 बार पीने आमाशय का जख्म ठीक होता है। मुलहठी की जड़ का 40 ग्राम काढ़ा बनाकर शहद मिलाकर सुबह-शाम पीने से आमाशय का जख्म एवं दर्द में आराम मिलता है।
12. पटोल
:
पटोल के बीजों का काढ़ा बनाकर 50 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार पीने से आमाशय का घाव व दर्द ठीक होता है।
13. पाठा :
पाठे की जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से आमाशय का दर्द शांत होता है और उल्टी व कमजोरी दूर होती है।
14. चम्पा
:
चम्पा के फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से आमाशय की पीड़ा में आराम मिलता है।
15. मूली
:
मूली के रस में नमक मिलाकर पीने से आमाशय का घाव ठीक होता है।
16. सागवान
:
सागवान की लकड़ी को पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 5 से 12 ग्राम खाने से पित्त के कारण होने वाले पेट (आमाशय) की जलन शांतहोती है।
17. पुदीना
:
100 मिलीलीटर पुदीने का रस गर्म करके 9 ग्राम शहद और 6 ग्राम नमक मिलाकर पीने से उल्टी होकर पेट का दर्द ठीक होता है।
18. बबूल
:
बबूल की गोंद पानी में घोलकर पीने से आमाशय और आंतों की पीड़ा दूर होती है।
19. आम
:
आम की भुनी हुई गुठली की मींगी का चूर्ण बनाकर खाने से आंतों की कमजोरी दूर हो जाती है।
20. छोटी
पीपल
:
छोटी पीपल का चूर्ण एक चौथाई से आधा ग्राम की मात्रा में दही के साथ सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय में आराम मिलता है।
21. कूठ
:
कूठ को गुलाब के जल में पीसकर पेट पर लेप करने से पेट का बढ़ना ठीक होता है और हाथ-पैर की सूजन दूर होती है।
22. अंगूर
:
अंगूर, नारियल एवं आलू के रस में शहद मिलाकर पीने से आमाशय के घाव में आराम मिलता है।
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